Hindi Bol

सच्ची बातें, हिंदी बोल

हिंदी बोल बोलने वालों की सोच

admin

हिंदी बोल बोलने वालों की सोच

हिंदी बोल एक बड़ी बात है।
दोस्तो इस लेख को पूरा पढ़ें तभी हिंदी बोल का सही मतलब जान पाएंगे।

दोस्तों हिंदी भारत की राष्ट्रीय भाषा है जे तो सभी जानते है।

हिंदी दुनिया भर सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषाओं में से एक है।

मगर बड़े दुख की बात है। हिंदी राष्ट्रीय भाषा होने के बाबजूद।
भारत में ऐसे भी कई राज्य है जहाँ के लोग हिंदी नही जानते।

जिसके फल सरूप भारतीय नागरिक को कई सारी समसयाओं का सामना करना पता है।
जैसे कोई व्यक्ति अपने राज्य से दूसरे राज्य में काम करने जाए और उस राज्य में बहुत कम लोगो को हिंदी बोलना आता हो।
तो उसे कई सारी समसया हो सकती है।

जिन लोगो को हिंदी नही बोलना आता वो भी अगर दूसरे राज्यों में काम या व्यपार करने की सोचे,
तो जे बहुत चुनौती भरा हो सकता है।

इतना ही नही देश को बेहतर बनाने के लिये बहुत जरूरी है भारत के प्रतेक व्यक्ति को हिंदी बोलना आना चाहिये तभी देश तराकी के मामले में, दुनिया के नम्बर एक पर आएगा,

हिंदी बोल /सरकार:-

सरकार को हिंदी के प्रति और ज्यादा धयान देने की जरूर है।
स्कूलों में हिंदी विषय पर और ज्यादा धयान देने की जरूरत है।

सरकारी ऑफ़िस में हिंदी भाषा का प्रयोग करने पर थोड़ा और विचार करने की जरूरत है,

हिंदी बोल, एक घटना

एक सच्ची घटना में आप को बताने जा रहा हूँ। जो दर्शाता है। हिंदी नही बोल सकने से कितनी बड़ी समसया हो सकती है।
मेने एक सफर दौरान जाना।

जब मैं कलकत्ता ( हावड़ा ) से चेन्नई ट्रैन में बैठा मेरी मुलाकात यदुनाथ नामक एक व्यक्ति से हो गई जिनकी उम्र 50 के आस पास होगी।
बातों से पता चला वह तमिलनाडु के रहने वाले है।
और वह भारतीय सेना में रह चुके थे।

काफी बात चीत करने के बाद मेने एक सवाल उनसे पूछ लिया।
चेन्नई में सभी हिंदी नही बोल सकते तो फिर आप इतनी अछि हिंदी कैसे बोल लेते है?

उन्होंने बताया पहले में हिंदी नही बोल सकता था।
जब मैं सेना में था।
कारगिल युद्ध हुए था वो तो जानते ही होंगे।
मुझे कारगिल भेजा गया दो से तीन दिन के बाद बाद मुझे जहा से वहाँ भेज देते।
जब मैने अपने सीनियर से पूछा की मेरी ड्यूटी हर दो दिन में बदल किउ जाती है।
तो उन्होंने बताया,
मुझे हिंदी नही आती इस लिये दूसरों को मेरे साथ डियूटी करने में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इस बात को सुन कर मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई।
ओर जब मेरी छूटिया पड़ी तो मैं अपने घर नही गया,
दिल्ही में मेरे चाचा जी रहते थे।
मैं वहां गया और हिंदी लिखने पढ़ने और बोलने की प्रैक्टिस किया।
इस वॉर जब मैंने डियूटी जॉइन किया तो मेरी हिंदी लिखावट ओर हिंदी बोल सुन कर सभी हैरान थे।
फिर मेरी ड्यूटी 6-6 महीने तक एक ही जगह पर लग जाती थी।

दोस्तों जे बातें बोलते समय यदुनाथ के आँखों में आंसू भर गए थे।
मुझे भी इस घटना ने काफी हद तक प्रभावित किया,

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